• Vijeta Gawdi

Yaadein- यादें

Updated: Apr 28, 2020




आज यादों की गलियों से जब मैं गुजरी।

अन्गिनत लम्हों की कलियाँ मुझे देख महकने लगी।

हर पंखुड़ी में एक किस्सा छुपा।

हर क्यारी में एक कहानी पूरी।


बचपन मुझे देख मुस्काया।

बोला,तेरी कई शरारतों को है मैने छुपाया।

कीचड़ में साफ़ पैरों का छप छपाना।

बारीश के पानी में तेरा नौका दौड़ाना।

पैडों से तोड़, अंबियाँ चुराना।

पन्ने के रस में, उंगलियाँ डुबाना।

सोई दोपहर को अपने कल्वर् से जगाना।

काग़ज़ की पुड़ियों में इमली चूरन खाना।

माँ का डाँटना, पापा का मनाना।

छोटी छोटी बातों पर , फिर रूठ जाना।


जवानी की फिर आई क्यारी।

कई रंगों से भरी, सुंदर प्यारी।

कलियों पर मंडराते भौंरे-तितलियाँ।

याद दिलाते मुझे,अपनी अठखेलियों।

दोस्तों और यारों के हसीन किससे।

काश लौट आए, वह दिन फिर से।

आसमानों को छूने की अभिलाषा।

कभी सफलता, कभी निराशा।

आँखों में सपने,दिल में लिए अरमा।

चलते चलते बना,यादों का कारवां।


अगली क्यारी, थोड़ी मुरझाई सी।

चिंता और आकुलता से घिराई सी।

सैक्डो पतझड़ का, जैसे किया हो सामना।

अडिग रही, मन में लिए जीवन की कामना।

यह मेरे जीवन का, कौन सा था पहलू।

सोचा मैने बैठकर, कुछ पल यहीं रह लूँ।

नन्ही कलियाँ,अब बन गई थी फूल।

अपनी बाहों में छोटी कलियों को लेकर,रही थी झूल।

तब जाकर, हर बात समझ आई।

यह वही लम्हे थे,जब माँ थी मैं कहलाई।


Love you Mom:)

Vijeta Gawdi

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